समाचार
चीन के 3.1 अरब डॉलर के ऋण से मालदीव चिंतित, श्रीलंका जैसा हाल होने का डर

मालदीव पर चीन ने इतना ऋण का बोझ लाद दिया है कि अब उसे श्रीलंका जैसे हालात होने का डर है। देश के पूर्व राष्ट्रपति और अब संसद के सभापति मोहम्मद नाशीद का कहना है कि कागज़ में जो ऋण हासिल हुआ था, वह असल में प्राप्त हुई राशि से अधिक है।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, मालदीव को 3.1 अरब डॉलर का ऋण चुकाना है, जबकि उसकी कुल अर्थव्यवस्था ही 4.9 अरब डॉलर की है। नाशीद ने आशंका ज़ाहिर की है कि अगर उनका देश ऋण नहीं चुका पाता है तो वह डिफॉल्ट घोषित हो जाएगा और उसका हाल श्रीलंका जैसा हो सकता है।

देश के पूर्व राष्ट्रपति के मुताबिक, 3.1 अरब डॉलर का ऋण सरकार, सरकारी कंपनियों के अलावा निजी कंपनियों को भी दिया गया था, जिसकी गारंटी सरकार ने ली थी। ऋण के धन से जो परियोजनाएँ शुरू हुई थीं, वे इस लायक नहीं हैं कि ऋण चुका सकें।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2013 में मालदीव की सत्ता संभालने वाले अब्दुल्ला यामीन ने चीन से अपनी अर्थव्यवस्था को तेजी देने के लिए भारीभरकम ऋण लिया था। चीन से साँठ-गाँठ में लगे यामीन ने मोहम्मद नाशीद और अधिकतर विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। हालाँकि, यामनी 2018 में चुनाव हार गए और फिर इब्राहिम सोलिह राष्ट्रपति बने।

इसके बाद नाशीद दोबारा राजनीति में लौटे। सत्ता में आई सरकार ने जब हिसाब-किताब देखा तो हैरान रह गई। बता दें कि मालदीव के कारोबारी अहमद शियाम ने चीन के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक से 127.5 मिलियन का लोन लिया था। जुलाई में वह लोन नहीं चुका पाए तो बैंक ने मालदीव सरकार को अगस्त में 10 अरब डॉलर चुकाने को कहा। ऐसा इसलिए क्योंकि यामीन सरकार ने निजी कंपनियों की ओर से लिए गए कर्ज की गारंटी ली थी।