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एलसीए तेजस की उपयुक्तता का आँकलन करने भारत आएगी मलेशियाई वायुसेना

एक प्रमुख विकास में मलेशियाई वायुसेना की एक टीम के आने वाले दो महीनों में स्वदेशी रूप से विकसित हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस की उपयुक्तता का आँकलन करने के लिए भारत आने की उम्मीद है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत यात्रा के दौरान मलेशियाई टीम को एलसीए की उत्पादन सुविधाओं, परीक्षण अवसंरचना और लड़ाकू विमान की क्षमता के प्रदर्शन का पूरा मौका दिए जाने की संभावना है।

भारत ने आधुनिक एईएसए राडार, नए वैमानिकी के साथ एलसीए के मार्क-1ए संस्करण और मलेशियाई वायुसेना में कई तरह के हथियारों को एकीकृत करने की क्षमता प्रदान करने के लिए कहा है। मलेशिया से संभावित निर्यात आदेश में भविष्य में 24 और लड़ाकू विमानों के विकल्प के साथ शुरुआती दौर में 12 लड़ाकू विमानों के होने की संभावना है।

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय लड़ाकू विमान मलेशियाई वायुसेना के शीर्ष दावेदार के रूप में उभरा है क्योंकि यह स्वीडिश ग्रिपेन की तुलना में सस्ता है और पाकिस्तान के चीनी मूल के जेएफ-17 जेट की तुलना में अधिक आधुनिक व सक्षम है। एलसीए तेजस, ग्रिपेन और जेएफ 17 के अलावा दक्षिण कोरियाई टी50 भी अनुबंध का एक दावेदार है।

विमान के अलावा भारत ज़मीन और वायु दोनों कर्मियों को प्रशिक्षित करने में मलेशियाई वायुसेना के पूर्ण समर्थन की भी पेशकश कर रहा है। वह एक उच्च उपलब्धता दर सुनिश्चित करने के लिए मलेशिया में जेट विमानों के लिए एक पूर्ण रखरखाव, मरम्मत और संपूर्ण सुविधा का निर्माण करने की भी पेशकश कर रहा है।

यह गौर किया जाना चाहिए कि भारतीय वायुसेना (आईएएफ) पहले ही 83 तेजस जेट विमानों के लिए आदेश दे चुकी है। विमान की कीमत सिर्फ 4.2 करोड़ डॉलर प्रति यूनिट है।