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फिर टली राम जन्मभूमि की सुनवाई, सर्वोच्च न्यायालय ने दिया मध्यस्थता का अवसर

मंगलवार (26 फरवरी) को सर्वोच्च न्यायालय ने राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई को टालकर 5 मार्च की तारीख दी है ताकि यह निर्णय कर पाए कि इस मामले में मध्यस्थता की आवश्यकता है या नहीं, बार एंड बेंच  ने रिपोर्ट किया।

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबदे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस अब्दुल नज़ीर की पाँच जजों की पीठ करेगी। शीर्ष न्यायालय ने संबंधित पार्टियों से छह सप्ताह में अनुवादित दस्तावेजों की जाँच करने को कहा है।

“सुनवाई शुरू होने के बाद हम नहीं चाहते कि कोई पार्टी दस्तावेजों के अनुवाद में त्रुटियाँ निकालकर सुनवाई में विलंब करे।”, रंजन गोगोई ने कहा। “हालाँकि पार्टियों के बीच मध्यस्थता की एक प्रतिशत ही संभवना है, फिर भी हमें यह अवसर देना चाहिए।”, न्यायाधीश एसए बोबदे ने कहा।

यह मामला 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के संबंध में 14 याचिकाओं पर सुनवाई का है जिसमें 2.77 एकड़ की भूमि को तीन भागों में विभाजित कर वक़्फ़ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला को दिए जाने का निर्णय दिया गया था।