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महाराष्ट्र- न्यूनतम पाँच वर्ष गाँवों में सेवा देने वाले चिकित्सकों को मिल सकता है आरक्षण

ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने एक ज़रूरी कदम उठाया है। अब एमबीबीएस की 10 प्रतिशत और मेडिकल पोस्ट-ग्रेजुएशन (पीजी) की 20 प्रतिशत सीटें उनके लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव दिया गया है, जो प से 7 साल के लिए गाँवों में अपनी सेवा देने को तैयार हैं।

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार की आरक्षण योजना को बहुत सख्त तरीके से लागू करने की योजना है। इसके तहत आरक्षण का लाभ उठाते हुए कोर्स पूरा करने वाले चिकित्सकों ने अगर राजकीय अस्पतालों में काम नहीं किया तो उनके लाइसेंस रद्द करने के साथ उन्हें 5 वर्ष जेल की सजा भी हो सकती है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाली महाराष्ट्र कैबिनेट ने इस फैसले को मंजूरी दी है। अब इस कानून के लिए सरकार विधेयक लेकर आएगी। आरक्षित सीटें राज्य और नागरिक-संचालित मेडिकल कॉलेजों के साथ उन उम्मीदवारों के लिए भी होंगी, जो सरकारी केंद्रों में लंबे समय तक काम करना चाहते हैं।

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित चिकित्सकों की भारी कमी है। मेडिकल जर्नल लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 25,300 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में से 8 प्रतिशत से अधिक चिकित्सक के बिना थे। 38 प्रतिशत बिना प्रयोगशाला तकनीशियन के थे और 22 प्रतिशत के पास कोई फार्मासिस्ट नहीं था।

इसके अलावा, महिला स्वास्थ्य सहायकों के लिए लगभग 50 प्रतिशत और पुरुष स्वास्थ्य सहायकों के लिए 61 प्रतिशत पद खाली हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में सर्जन की 83 प्रतिशत, प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ की 76 प्रतिशत, चिकित्सक की 83 प्रतिशत और बाल रोग विशेषज्ञ की 82 प्रतिशत कमी है।