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नए कृषि कानूनों से महाराष्ट्र के किसानों को लाभ लेकिन सर्वोच्च न्यायालय की रोक से बाधा

मोदी सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि सुधार कानून किसानों के लिए एक वैकल्पिक विपणन चैनल बनाने में महाराष्ट्र में किसान निर्माता कंपनियों (एफपीसी) की सहायता कर रहे हैं।

बिज़नेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, किसान वॉट्सैप ग्रुप या एसएमएस से बाज़ार दरें प्राप्त कर रहे हैं, जो उन्हें यह तय करने में मदद करती है कि वे अपनी उपज को कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) की मंडियों में बेचें या फिर एफपीसी खरीद केंद्रों पर।

महाराष्ट्र किसान निर्माता कंपनी (महाएफपीसी) के एमडी योगेश थोराट (जो लगभग 400 एफपीसी का संघ है) कहते हैं, “एपीएमसी के बारे में नया कृषि कानून किसानों को बाज़ार चुनने की स्वतंत्रता देता है। यदि दरें एमएसपी से अधिक हैं तो किसान उपज को एपीएमसी मंडी के बाहर एफपीसी के खरीद केंद्रों को बेचते हैं और जब दरें एमएसपी से कम होती हैं तो वे उपज को एपीएमसी मंडी में ले जाते हैं।”

वे कहते हैं, “एफपीसी सुनिश्चित कर रहे हैं कि व्यापार प्रतिबद्धताओं का पालन किया जाए और किसानों को समय पर पैसा मिले, अगर वे एफपीसी को उपज बेचते हैं। एक प्रतिस्पर्धी माहौल किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में मदद कर रही है।”

समाचार कि नए कृषि कानून के बल पर राज्य के लातूर, उस्मानाबाद, हिंगोली और नांदेड़ जिलों में महाएफपीसी के सदस्यों ने मंडियों के बाहर अपनी उपज बेचकर लगभग 10 करोड़ रुपये कमाए हैं।

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोल कहते हैं, अगर घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो सरकार को दालों और प्याज जैसी कृषि उपज का आयात नहीं करना चाहिए। बाजार को उसके नियमों के अनुसार चलने दें और किसान लाभ और हानि उठाएँगे।

एफपीसी ने यह भी शिकायत की कि उच्चतम न्यायालय द्वारा कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक से मंडियों के बाहर बिक्री में बाधा उत्पन्न हुई है।