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नेस्ले के लिए मैगी हानिकारक? न्यायालय में सरकार का 640 करोड़ रुपए का दावा

भारत सरकार ने नेस्ले इंडिया पर अनुचित व्यापार प्रक्रिया, गलत अंकितक तथा भ्रामक विज्ञापन के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में मुकदमा दर्ज किया है जिसके तहत कंपनी को 640 करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। गुरुवार (3 जनवरी 2019) को सर्वोच्च न्यायालय इस मुकदमे को पुन: पूर्वरूप में लेकर आई, द न्यू इंडिया एक्सप्रेस  की रिपोर्ट में बताया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश डीवाइ चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) की रिपोर्ट के अनुसार आगे की प्रक्रिया की जाएगी। मैगी के नमूनों का मैसूर में सीएफटीआरआई में परीक्षण किया जाएगा।

पहले सर्वोच्च न्यायालय ने एनसीआरडीसी को इस मुकदमे की प्रक्रिया करने को कहा था लेकिन बाद में नेस्ले ने इसे चुनौती दी थी।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने एनसीडीआरसी के समक्ष नेस्ले के विरुद्ध मुकदमा किया था। मंत्रालय ने पहली बार संविधान के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (सीपीए), 1986 के खंड 12-1-डी कोई कदम लिया जो राज्य तथा केंद्र को शिकायत दर्ज करने का अधिकार देता है।

गौरतलब है कि मंत्रालय ने नेस्ले पर अनुचित व्यापार प्रक्रिया तथा मैगी नूडल के गलत अंकितक से भारतीय ग्राहकों को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया था।

उसी वर्ष भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक (एफएसएसएआई) ने मैगी नूडल में लेड अधिक मात्रा में पाए जाने के कारण उस पर प्रतिबंध लगा दिया था। एफएसएसएआई ने नूडल को इंसानों के खाने के लिए “असुरक्षित और हानिकारक” बताया था।