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आयकर विभाग की जाँच रिपोर्ट सीबीआई के हवाले, मुश्किल में कमलनाथ और उनके करीबी

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ सरकार को बड़ा झटका लगा है। उनके पाँच सहयोगी और कांग्रेस पार्टी के 11 नेता सात अप्रैल को हुई आयकर विभाग की छापेमारी के मामले में जाँच के घेरे में आ गए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आयकर विभाग ने छापेमारी की जाँच रिपोर्ट और साक्ष्यों को चुनाव आयोग को सौंपा था। अब आयोग ने आगे के अभियोजन के लिए उसे सीबीआई को भेज दिया है।

आयकर विभाग के जाँचकर्ताओं ने कथित रूप से लेखांकन रिकॉर्ड्स को साक्ष्यों और ट्रांसफर किए गए रुपयों को वॉट्सैप व टेलीफोन की बातचीत के आधार पर ट्रैक किया था। चुनाव आयोग ने मामले में चार मई को सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी। आरोप है कि विभिन्न उम्मीदवारों के इस्तेमाल के लिए रुपयों को इधर-उधर भेजा गया था।

छापे में यह भी पता चला है कि 20 करोड़ रुपये का भुगतान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को किया गया था। जाँच रिकॉर्ड से जाकारी मिली कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह उन उम्मीदवारों की सूची में सबसे ऊपर हैं, जिन्हें छापेमारी में शामिल लोगों से चुनावी राशि मिली थी। माना जाता है कि उन्हें 90 लाख रुपये मिले थे।

इन जानकारियों को लेखाकार ललित कुमार चेलानी के कंप्यूटर से इकट्ठा किया गया था, जो आरके मिगलानी और प्रवीण कक्कड़ के लिए काम करता था। यह दोनों ही मुख्यमंत्री कमलनाथ के सहयोगी हैं। रिकॉर्ड से यह भी पता चला कि 10 लोकसभा उम्मीदवारों को चेलानी के जरिए कथित तौर पर 25 से 50 लाख रुपये तक दिए गए थे।