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चर्च में हो रहे यौन शोषण के विरुद्ध #मीटू के बाद सामने आ रहा है #ननटू

एक मामला जो कि बहुत समय से छुपा हुआ था अब वह #मीटू के ज़माने में सामने आ रहा है। चर्चों में बहुत समय से हो रहे ननों के यौन शोषण की घटनाओं से #ननटू आंदोलन शुरू हुआ है, एनपीआर  ने रिपोर्ट।

वेटिकन दैनिक अखबार लोसरवटोरे रोमानो  के अनुभाग वीमेन चर्च वर्ल्ड ने फरवरी में वहाँ की संपादक लुकेट्टा स्कारफिअ ने एक लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने सैंकड़ों ननों से सुनी कहानियों को छापा, जिसमें बताया गया था कि किस तरह चर्चों में ननों का यौन शोषण किया जाता है। संपादक ने महिलाओं और नाबालिगों के शोषण के लिए पादरियों को दोषी ठहराया।

संपादक ने कहा, “यह नन खुद को दोषी मानती हैं कि उन्होंने इन पादरियों को लुभाया है और उस शिक्षा का उल्लंघन किया है जो इन्हें हमेशा से चर्च से मिलती आ रही थी”।

संपादक ने आगे लेख में लिखा, “इससे भी बुरा कि जब वह गर्भवती हो जाती हैं तब उनका समाज से बहिष्कार कर दिया जाता है और उन्हें अपने पद से निकाल दिया जाता है, यह गरीब नन अकेली रहती हैं और बिना किसी की सहायता से उन्हें अपने बच्चे पालने पड़ते हैं, और बहुत सी बार इन नन  को गर्भपात के लिए भी बोल दिया जाता है, और इसके पैसे भी पादरी ही देते हैं क्योंकि नन के पास पैसे नहीं होते”।

करजीलीन डेमसुर, महिलाओं और नाबालिगों पर हो रहे यौन शोषण की एक बेल्जियन विशेषज्ञ हैं, जो रोम के एक विश्वविद्यालय में पढ़ाती हैं, उनका इस #ननटू पर कहना है कि #मीटू का इस बात पर बहुत ज़्यादा प्रभाव पड़ा है कि आज नन के यौन शोषण के मामले प्रेस में और लोगों के सामने आ रहे हैं।