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तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद अशरफ गनी बोले, “रक्तपात रोकने हेतु देश छोड़ा”

अफगानिस्तान कल (15 अगस्त) को छोड़ने के बाद अपनी पहली सार्वजनिक टिप्पणी में अशरफ गनी ने कहा कि तालिबान द्वारा काबुल पर अपना नियंत्रण स्थापित करने के बाद उन्होंने रक्तपात से बचने के लिए ऐसा किया।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अशरफ गनी ने कहा, “अगर मैं देश नहीं छोड़ता तो कई नागरिक शहीद हो जाते और काबुल शहर बर्बाद हो जाता। इस प्रकार 60 लाख की आबादी वाले शहर में बड़ी मानवीय त्रासदी देखनी पड़ती।”

फेसबुक का सहारा लेते हुए गनी ने कहा कि उन्हें सशस्त्र तालिबान या अपना प्रिय देश छोड़ने के मध्य कठिन विकल्प का सामना करना पड़ा। तालिबान ने अपनी तलवारों और बंदूकों के निर्णय से जीत प्राप्त की है और अब वे अपने देशवासियों के सम्मान, संपत्ति और आत्म संरक्षण के लिए जिम्मेदार हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “वे अब एक नई ऐतिहासिक परीक्षा का सामना कर रहे हैं। वे अफगानिस्तान के नाम और सम्मान की रक्षा करेंगे या वे अन्य स्थानों और नेटवर्क को प्राथमिकता देंगे।”

यह गौर किया जाना चाहिए कि पहली शांति वार्ता के दौरान तालिबान की प्रमुख मांगों में से एक गनी का राष्ट्रपति पद छोड़ना था। गनी तब भी नहीं माने थे।