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शिक्षाविदों का प्रधानमंत्री को खत- “विश्वविद्यालयों में जारी हिंसा वाम प्रायोजित”
आईएएनएस - 13th January 2020

विश्वविद्यालय के कुलपतियों सहित देश के 200 से अधिक शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि वामपंथी छात्र राजनीति के नाम पर परिसरों में हिंसा को प्रायोजित कर रहे हैं।

11 जनवरी को दिनांकित और 208 कुलपतियों, प्रोफेसरों और शिक्षाविदों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि वामपंथी कार्यकर्ताओं द्वारा परिसर को, “हिंसा की आग”, में झुलसाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, शिक्षाविदों के इस समूह ने मांग की है कि प्रधानमंत्री शैक्षणिक संस्थानों को अराजकता के माहौल से मुक्त करें।

हाल की घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र-प्रशासित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली की जामिया मिल्लिया और कोलकाता की जादवपुर यूनिवर्सिटी के मुट्ठी भर वामपंथी कार्यकर्ता इन विश्वविद्यालयों में अराजकता का माहौल बनाकर शैक्षिक गतिविधियों को रोक रहे हैं।

पत्र में कहा गया है कि जिन परिसरों पर वाम संगठनों की पकड़ है, उन पर विचारधारा थोपने की कोशिश की जा रही है। इस तरह के परिसरों को निजी सम्पदा माना जा रहा है जहाँ व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला हो रहा है, वहीं शिक्षकों को भी असहिष्णुता का सामना करना पड़ रहा है।

पत्र में लिखा गया है, “विश्वविद्यालयों में वामपंथी संगठनों की राजनीति से गरीब छात्रों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है, जो दूर-दूर से पढ़ाई करने आते हैं। लेकिन परिसर में अशांति पैदा होने से ऐसे छात्रों के लिए मुश्किलें पैदा हो रही हैं।”

शिक्षाविदों के इस समूह ने कहा है कि इस समय यह आवश्यक है कि सभी लोकतांत्रिक ताकतें आगे आएँ और शिक्षाविदों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद करें।

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख शिक्षाविदों में मध्य प्रदेश में हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलपति आर पी तिवारी, दक्षिण बिहार का केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति एचसीएस राठौर, महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति रजनीश कुमार शुक्ल शामिल हैं।

(इस समाचार को वायर एजेंसी फीड की सहायता से प्रकाशित किया गया है।)