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इस्पात व तेल पीएसयू देश में कुल ऑक्सीजन की मांग की करीब 60 प्रतिशत पूर्ति कर रहे

वर्तमान में इस्पात और पेट्रोलियम मंत्रालयों के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ देश की कुल दैनिक विनिर्माण क्षमता 4000-4500 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 7000-7200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन कर रही हैं।

केंद्रीय इस्पात एवं पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पूरी प्रक्रिया की देखरेख कर रहे हैं, जबकि उनकी टीम कई राज्यों और मंत्रालयों के साथ समन्वय में जुटी है।

इस्पात, तरल नाइट्रोजन और आर्गन के उत्पादन में कटौती की गई है, ताकि इस्पात संयंत्रों की ओर से ऑक्सीजन उत्पादन में वृद्धि हो सके। बढ़ी हुई आपूर्ति को पूरा करने के लिए सामान्य सुरक्षा स्टॉक को सामान्य 3.5 दिनों से घटाकर 0.5 दिन कर दिया गया है।

एक सप्ताह में स्टील पीएसयू ने ऑक्सीजन भेजने की मात्रा को 1700 मीट्रिक टन से बढ़ाकर अब दैनिक आधार पर 2,894 टन कर दिया है।

उदाहरण के तौर पर पीएसयू राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) प्रतिदिन 140 टन मेडिकल ऑक्सीजन पहुँचा रहा है। इसी तरह स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) अगस्त 2020 से 24 अप्रैल 2021 तक 34,647 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन का वितरण कर चुका है।

द इकॉनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में धर्मेंद्र प्रधान के हवाले से कहा गया, “प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में कंपनियों को यह संदेश दिया गया है कि जो संभव हो परिवहन और आपूर्ति में वृद्धि सुनिश्चित करें। रिफाइनरियों और इस्पात संयंत्रों ने औद्योगिक उपयोग की अपनी मांग को कम करके तरल चिकित्सा ऑक्सीजन के उत्पादन को अधिक बढ़ाया है।”

दूसरी ओर, तेल पीएसयू देशभर में 93 स्थानों पर प्रेशर स्विंग एबॉर्पशन (पीएसए) चिकित्सा ऑक्सीजन संयंत्रों की स्थापना कर रहे हैं।