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आईटी पर संसदीय समिति ने ट्विटर से कहा- “देश का कानून सर्वोच्च है, आपकी नीति नहीं”

सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति ने शुक्रवार (18 जून) को ट्विटर से कहा कि देश का कानून सर्वोच्च है लेकिन उसकी नीति नहीं। उसने यह भी पूछा कि नियमों का उल्लंघन करने पर माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट पर जुर्माना क्यों न लगाया जाए।

कांग्रेस के शशि थरूर की अध्यक्षता में 31 सदस्यीय संसदीय स्थायी समिति, जिसमें 21 लोकसभा सदस्य और 10 राज्यसभा सदस्य शामिल हैं, ने अपने मंच के दुरुपयोग से संबंधित मुद्दों पर ट्विटर को तलब किया था।

सूत्रों ने कहा कि ट्विटर इंडिया की सार्वजनिक नीति प्रबंधक शगुफ्ता कामरान और कानूनी वकील आयुषी कपूर ने समिति के समक्ष गवाही दी थी। समिति के सदस्यों ने तथ्यों को जाँचने वालों की नियुक्त करने की उसकी नीति पर यह पूछते हुए सवाल उठाया था कि उनकी विश्वसनीयता क्या है।

एक सूत्र ने कहा, “सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने दावा किया कि ट्विटर इंडिया के अधिकतर तथ्यों की जाँच करने वाले नरेंद्र मोदी शासन का विरोध कर रहे हैं। पक्षपातपूर्ण नज़रिए से वे निष्पक्ष तथ्य की जाँच कैसे कर सकते हैं।”

समिति के एक भाजपा सदस्य ने कहा कि माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ने पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा के ट्वीट को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वाले मीडिया के रूप में संदर्भित करने के लिए जल्दी की थी लेकिन उसने हाल ही में गाजियाबाद की घटना या दिल्ली के दंगों के बारे में कुछ नहीं किया। सूत्रों का कहना है कि इस पर ट्विटर के सदस्यों ने जवाब नहीं दिया।