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केंद्रीय विद्यालय प्रार्थना के विरुद्ध याचिका- “असतो मा सद्गमय” पर बड़ी बेंच करेगी फैसला

केंद्रीय विद्यालयों में संस्कृत प्रार्थनाओं के विरुद्ध दायर की गई याचिका को सर्वोच्च न्यायालय की दो जजों की बेंच ने सोमवार (28 जनवरी) को प्राथमिक महत्त्व का बताते हुए 5 जजों की पीठ को सौंप दिया है, लाइव लॉ  ने बताया।

याचिकाकर्ता मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के विनायक शाह हैं जिनका कहना है कि प्रार्थना के श्लोक संस्कृत ग्रंथों से लिये गए हैं जो अल्पसंख्यकों, नास्तिकों, धार्मिक क्रियाकलाप में न मानने वालों, संदेहवादियों आदि के अधिकारों का हनन करते हैं। न्यायाधीश आरएफ नरीमन और विनीत सारन की बेंच के समक्ष उन्होंने कहा, “प्रातः सभाओं में अनिवार्य कर इन श्लोकों के वाचन पर बहुत ज़ोर दिया जाता है। यह युवा मस्तिष्क के विकास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करने में बाधा डाल सकता है।”

मुख्य पब्लिक प्रॉसिक्युटर तुषार मेहता ने इस मामले को बड़ी पीठ को सौंपे जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह श्लोक संस्कृत भाषा के हैं लेकिन इनका जुड़ाव किसी विशेष धर्म से देखा जाना अनुचित है। उनका कहना है कि ये श्लोक सार्वभौमिक सत्य हैं। इसको अस्वीकारते हुए न्यायाधीश नरीमन ने कहा कि “असतो मा सद्गमय” उपनिषद से लिया गया है इसलिए मामला बड़ी बेंच को सौंपा जा रहा है।