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“किरण बेदी लाओ, दिल्ली पुलिस बचाओ” के नारे के बाद ट्विटर पर साझा की भावनाएँ
आईएएनएस - 6th November 2019

दिल्ली पुलिसकर्मियों के पुलिस मुख्यालाय के बाहर विरोध प्रदर्शन के बाद उन्होंने “किरण बेदी लाओ, दिल्ली पुलिस बचाओ” के जोरदार नारों के साथ अपने सबसे प्रिय अधिकारी को याद किया। इस पर पुदुचेरी की उप-राज्यपाल ने अपनी यादों और भावनाओं को ट्विटर पर साझा किया।

प्रदर्शन करने वालों ने पूर्व आईपीएस अधिकारी की तख्तियाँ लेकर उन्हें वापस लाने की मांग की। इस पर बुधवार को किरण बेदी ने ट्विटर पर लिखा, “नेतृत्व एक चरित्र है, जो जिम्मेदारी लेता है और कठोर निर्णय लेता है। इस समय निर्णय लेना चाहिए। ये कठिन समय चला जाएगा। स्मृतियों में कठिन कानून रहेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “अधिकार और उत्तरदायित्व एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। नागरिकों को इसे नहीं भूलना चाहिए। हम जो भी हों और जहाँ भी हों, अगर हम सभी कानून का पालन करते हैं तो कोई विवाद नहीं होता है।”

दरअसल, 7 फरवरी 1988 को तीस हजारी कोर्ट परिसर में चोरी के संदेह में एक आरोपी को हथकड़ी लगाकर लाने का वकीलों ने विरोध किया था। तब भी ऐसी ही स्थिति बनी थी। उस वक्त किरण बेदी ने पुलिसकर्मियों का समर्थन किया था।

हालाँकि, इस बार की घटना पुलिसकर्मियों के लिए विपरीत रही क्योंकि उन्हें प्रदर्शन को बंद करने के लिए कहा गया था। आईएएनएस से बात करते हुए एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल ने कहा, “अमूल्य पटनायक के अधिकारी होने का कोई फायदा नहीं है। किरण बेदी जैसी कमिश्नर होती तो हमें सड़कों पर नहीं उतरना पड़ता। वे अपने मातहतों की चिंताओं पर ध्यान देती थीं।”

2 नवंबर की घटना में कम से कम 20 पुलिसकर्मी और कई वकील घायल हो गए थे। वकीलों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन पर गोलीबारी की। दिल्ली उच्च न्यायालय ने रविवार को एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, सीबीआई, खुफिया ब्यूरो और सतर्कता के निदेशकों की एक टीम बनाकर हिंसा की न्यायिक जाँच का आदेश दिया है।