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अटॉर्नी जनरल ने न्यायालय को बताया, “किसान प्रदर्शन में खालिस्तान ने की है घुसपैठ”

सर्वोच्च न्यायालय में मंगलवार (12 जनवरी) को कृषि कानूनों पर सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा, “खालिस्तानियों ने किसान विरोध प्रदर्शन में घुसपैठ की है।”

फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, तीन कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे ने सवाल किया, “मेरे पास याचिका है, जो कहती है कि किसान विरोध प्रदर्शन में मदद करने वाला एक प्रतिबंधित संगठन है।”

अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश के सवाल के जवाब में कहा, “हमने कहा है कि खालिस्तानियों ने विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ की है।”

सीजेआई ने अटॉर्नी जनरल को आदेश दिया, “अगर किसी प्रतिबंधित संगठन द्वारा घुसपैठ हो रही है और कोई हमारे सामने यहाँ आरोप लगा रहा है, तो आपको इसकी पुष्टि करनी होगी। इसको लेकर कल तक एक हलफनामा दाखिल करें।” इसके जवाब में केके वेणुगोपाल ने कहा, “हम इस संबंध में एक हलफनामा दायर करेंगे और आईबी का रिकॉर्ड रखेंगे।”

यह ध्यान देने योग्य है कि खालिस्तानी और भिंडरावाले का उल्लेख किसान विरोध प्रदर्शन के समर्थन में जारी किए गए गीतों की प्रमुख विशेषताएँ बन गए हैं। वर्ग श्रेष्ठता और हिंदू विरोधी कट्टरता उनमें से महत्वपूर्ण पहलू हैं। हालाँकि, अधिकांश गीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हैं। कुछ लोग उनके चाय बेचने वाले दिनों का मजाक उड़ाते हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अगुआई वाली पीठ ने मंगलवार (12 जनवरी) को नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली केंद्र सरकार के कृषि कानूनों कोअगले आदेश तक के लिए निलंबित कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी घोषणा की कि वह प्रदर्शनकारी किसानों और सरकार के बीच वार्ता आयोजित करने के लिए एक चार सदस्यीय समिति का गठन करेगा।