समाचार
सिस्टर अभया हत्याकांड के तीन दशक पुराने मामले में पादरी और नन ठहराए गए दोषी

केरल के तिरुवनंतपुरम में सीबीआई न्यायालय ने करीब तीन दशक पहले एक कॉन्वेंट के अंदर मृत पाई गईं सिस्टर अभया की हत्या के आरोप में कैथोलिक पादरी और एक नन को दोषी करार दिया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोषी फादर थॉमस कोट्टूर और सिस्टर सेफी के खिलाफ फैसला सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश जे सानल कुमार ने सुनाया। उन्होंने कहा, “सिस्टर अभया की मौत स्पष्ट रूप से हत्या का मामला था।” अब मामले में सजा बुधवार को सुनाई जाएगी।

मृतका के भाई बीजू थॉमस ने दोषी फादर थॉमस कोट्टूर और सिस्टर सेफी के खिलाफ फैसला आने के बाद खुशी व्यक्त की। सामाजिक कार्यकर्ता जोमन पुथनपुरक्कल, जिन्होंने सिस्टर अभया और उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए अकेले लड़ाई लड़ी, ने भी कहा, “मेरी 28 वर्ष की मेहनत अब जाकर सफल हुई है।”

मामले में मुख्य गवाह राजू, जो चोरी करता था ने भी फैसला आने पर खुशी व्यक्त की। मामले की जाँच करने वाले पुलिस अधिकारी वर्गीज पी थॉमस ने कहा, “फैसले से मैं बेहद खुश हूँ।” कानूनी विशेषज्ञों ने भी फैसले को ऐतिहासिक बताया है।

12वीं कक्षा की छात्रा सिस्टर अभया का शव 27 मार्च 1992 को कोट्टायम में पिटी एक्स कॉन्वेंट के कुएँ में मिला था। स्थानीय पुलिस ने प्रारंभिक जाँच के निष्कर्ष के बाद माना था कि नन की मौत आत्महत्या की वजह से हुई। सीबीआई ने 1993 में इस मामले को संभाला। एक दशक से भी अधिक समय की जाँच के बाद अपनी रिपोर्ट में दो कैथोलिक पादरी, फादर थॉमस कोट्टूर व फादर जोस पायथ्रुकायिल और एक नन सिस्टर सूफी को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया था। उन पर नन की हत्या, सबूतों को नष्ट करने और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए थे।