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दिल्ली सरकार और उप-राज्यपाल में अधिकारों की जंग- सुनवाई से केजरीवाल नाखुश

गुरुवार (14 फरवरी) को सर्वोच्च न्यायालय में दिल्ली सरकार और उप-राज्यपाल के बीच चल रहे मुकदमे पर सुनवाई हुई जिसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नाखुश दिखे। केजरीवाल का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का झुकाव उपराज्यपाल की तरफ रहा है।

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार 6 में से चार मुद्दे उपराज्यपाल के हित में हैं। मुकदमे  की सुनवाई के लिए दो जज बैठे थे जिसमे दोनों जजो ने बंटा हुआ फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि भ्रष्टाचार विरोधी शाखा और स्थानांतरण का अधिकार केंद्र सरकार के पास ही रहेगा। सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार जांच आयोग नियुक्त करने का अधिकार उपराज्यपाल के पास रहेगा।

इस बात पर केजरीवाल ने नाराज़गी जताते हुए कहा है कि इस तरह दिल्ली सरकार कैसे काम करेगी जब सरकार के पास अपने अधिकारियों का स्थानांतरण करने का और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की ताकत ही नहीं है।

सुनवाई में दिल्ली सरकार के हित में भी सार्वोच न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि भूमि राजस्व की दरें तय करने समेत भूमि राजस्व के मामलों का अधिकार दिल्ली सरकार के पास रहेगा और साथ ही बिजली आयोग या बोर्ड नियुक्त करने का अधिकार भी दिल्ली सरकार के पास रहेगा।

वहीं सेवाओं के नियंत्रण पर दोनों जजों का फैसला विपरीत रहा है इसलिए अब इस मामले की सुनवाई बड़ी बेंच पर की जाएगी।