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आईआरसीटीसी की काशी महाकाल एक्सप्रेस का पहला फेरा शिवरात्रि को होगा पूरा

वाराणसी से इंदौर के बीच चलने वाली आईआरसीटीसी की तीसरी रेलगाड़ी काशी महाकाल एक्सप्रेस आज (20 फरवरी) से अपनी पहली व्यावसायिक यात्रा शुरू करेगी।

यह ट्रेन भगवान शिव के तीन ज्योतिर्लिंगों को जोड़ेगी- इंदौर के निकट ओम्कारेश्वर, उज्जैन के महाकालेश्वर और वाराणसी में काशी विश्वनाथ को। आज दोपहर वाराणसी से सुरू होकर यह ट्रेन कल सुबह महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इंदौर पहुँचेगी।

16 फरवरी को इस ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में हरी झंडी दिखाई थी। इसके अलावा 1,250 करोड़ रुपये की 50 अन्य परियोजनाएँ भी शुरू की गई थीं।

बुधवार तक इस ट्रेन की 90 प्रतिशत सीटें आरक्षित हो चुकी थीं। यह ट्रेन सप्ताह में तीन दिन चलेगी, दो बार सुल्तानपुर-लखनऊ मार्ग से और एक बार प्रयागराज मार्ग से।

हर मंगलवार व गुरुवार को यह ट्रेन दोपहर 2.45 पर वाराणसी से चलकर बुधवार और शुक्रवार सुबह 9.40 बजे इंदौर पहुँचेगी। इंदौर से यह ट्रेन हर बुधवार और शुक्रवार सुबह 10.55 चलेगी व अगली सुबह 6 बजे वाराणसी पहुँचेगी।

यह ट्रेन आवागमन में उज्जैन, संत हिरदाराम नगर, बीना, झाँसी, कानपुर और प्रयागराज स्टेशनों पर रुकेगी। क्षेत्रीय मुख्य प्रबंधक अश्विनी श्रीवास्तव ने बताया कि आईआरसीटीसी ओम्कारेश्वर के लिए यात्रा पैकेज भी दे रहा है।

पूर्ण रूप से वातानुकूलित इस ट्रेन में उच्च स्तरीय सेवाएँ होंगी। हल्का भक्ति संगीत, हर कोच में दो निजी चौकीदार और केवल शाकाहारी भोजन इस ट्रेन की कुछ विशेषताएँ हैं।