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कपिल सिब्बल ने अर्णब गोस्वामी की बात को “अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य के दायरे में नहीं” माना

रिपब्लिक टीवी के मुख्य संपादक अर्णब गोस्वामी को सर्वोच्च न्यायालय ने उनपर दर्ज विभिन्न एफआईआर के कारण गिरफ्तारी से तीन सप्ताह की छूट दे दी है। मामले पर बहस करने के लिए शुक्रवार (24 अप्रैल) को विवेक तन्खा और मनीष सिंघवी के साथ वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल भी मौजूद रहे।

न्यायमूर्ति डॉ डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह की अध्यक्षता वाली पीठ ने अर्णब को अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया, तब तक गिरफ्तारी पर रोक लगी रहेगी। न्यायालय ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को रिपब्लिक टीवी के दफ्तर को सुरक्षा देने के लिए भी कहा।

न्यायालय ने कहा, “हम सभी एफआईआर में किसी तरह की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाते हैं। तब तक याचिकाकर्ता अपनी अर्जी में संशोधन करें। सभी एफआईआर को एक साथ जोड़ें। फिर आगे सुनवाई करेंगे। एक ही मामले की जाँच कई जगह नहीं हो सकती है।”

पालघर में साधुओं की नृशंस हत्या को लेकर अर्णब ने सोनिया गांधी की आलोचना की थी, जिसके बाद कांग्रेस पदाधिकारियों ने उनपर मुकदमे दर्ज करवाए।

सीएनएन न्यूज-18 के कानूनी संपादक उत्कर्ष आनंद के अनुसार, कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि 21 अप्रैल को प्रसारित होने वाले शो के दौरान अर्णब गोस्वामी की टिप्पणियाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आ सकती हैं। उन्होंने पत्रकार पर सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया।

सिब्बल ने कहा, “महाराष्ट्र सरकार अर्णब पर उनकी टिप्पणियों के खिलाफ मुकदमा चलाना चाहती है। इसे देखते हुए एफआईआर को खारिज नहीं किया जाना चाहिए। कौन जानता है कि कल अर्णब गोस्वामी के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दायर किया जा सकता है।”

छत्तीसगढ़ और राजस्थान के प्रतिनिधियों ने अर्णब के खिलाफ एफआईआर को रद्द करने का विरोध किया। उनका आरोप है कि उन्होंने विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देकर अपने प्रसारण लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन किया है।