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“न्यायपालिका की स्वतंत्रता आधा दर्जन लोगों के हाथ में”- पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और हाल ही में राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रंजन गोगोई के गुरुवार के बयान के बाद तब हंगामा होने लगा, जब उन्होंने कहा, “न्यायपालिका की स्वतंत्रता का मतलब है कि आधा दर्जन लोगों पर शिकंजा कसा जाए।”

न्यायपालिका में आधा दर्जन लोगों के समूह के वर्चस्व के बारे में बात करते हुए सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने कहा, “अगर उक्त समूह की इच्छा के मुताबिक निर्णय नहीं सुनाया जाता था तो न्यायाधीशों को बदनाम किया जाता था।”

रंजन गोगोई ने कहा, “वो फिरौती के लिए न्यायाधीशों को पकड़ते हैं। अगर किसी मामले में उनके द्वारा वकालत विशेष रूप से तय नहीं की जाती है तो वे न्यायाधीश को हर तरह से बदनाम या नुकसान पहुँचाने की कोशिश करते हैं। मैं यथास्थितिवादी न्यायाधीशों से डरता हूं, जो उन्हें नहीं लेना चाहते और जो शांति से सेवानिवृत्त होना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा, “वह समूह के न्यायाधीशों के प्रिय थे। फिर भी उन्होंने जनवरी 2018 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था। लॉबी चाहती है कि जज मामलों को एक निश्चित तरीके से तय करें और तभी उन्हें स्वतंत्र न्यायाधीश के रूप में प्रमाणित किया जाएगा।”

गोगोई ने कहा, “अगर न्यायाधीश एक मामले में फैसला आधा दर्जन लोग क्या कहेंगे इस अनुसार सुनाता है तो वह अपनी शपथ पर कभी खरा नहीं उतर सकता है।”