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हे मृत्यंजय- वीर सावरकर के क्रांतिकारी जीवन पर जेएनयू में पहला रंगमंच कार्यक्रम

गुरूवार (14 मार्च) शाम जवाहर लाल नेहरू (जेएनयू) विश्विद्यालय, दिल्ली में वीर सावरकर की क्रांतिकारी ज़िंदगी पर रंगमंच कार्यक्रम होगा जिसे स्वतंत्र वीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आयोजित करवाया है। यह रंगमंच कार्यक्रम सावरकर की  ज़िंदगी का वह पहलू दिखाएगा जब वह अंडमान में काला पानी की सज़ा काट रहे थे, एबीवीपी वॉइस  ने रिपोर्ट किया।

इस नाटक का नाम ‘हे मृतुन्जय’ रखा गया है, जिसके निर्देशक दिग्पाल लांजेकर है। इस नाटक के विज्ञापन पत्र पर लिख गया है. ‘कौन जीतेगा? मौत या सावरकर?’।

औपचारिक रूप से वकील, सावरकर को बहुत सी चीज़ों में महारथ हासिल थी। एक क्रांतिकारी होने के आलावा, वह एक बहुत अच्छे वक्ता, कवि, लेखक, समाज सुधारक और एक इतिहासकार भी थे जिसे अपने देश के इतिहास के बारे में बहुत पकड़ थी।

विनायक दामोदर सावरकर की दो किताबें, भारतीय इतिहास के छह शानदार युग  और 1857- भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई , ब्रिटश हुकूमत के द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद भी आज़ाद हिंद फ़ौज, भगत सिंह और बाकी के भारतीय क्रांतिकारियों में बहुत प्रसिद्ध थी।