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बंगाल के कांग्रेस प्रभारी बने जितिन प्रसाद, ब्राह्मणों के उत्पीड़न के विरुद्ध उठाई थी आवाज़

पश्चिम बंगाल में 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र कांग्रेस ने ब्राह्मण कार्ड खेलते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद को बंगाल का प्रभारी नियुक्त कर दिया। उन्हें यह ज़िम्मेदारी गौरव गोगोई की जगह दी गई है। जितिन को सीडब्ल्यूसी का विशेष आमंत्रित सदस्य से प्रोमोट कर स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।

कांग्रेस का चुनावी रणनीति में सबसे अधिक जोर ब्राह्मणों को रिझाने में है। जितिन प्रसाद ने उत्तर प्रदेश में 20 अगस्त से शुरू हुए विधानसभा सत्र से पहले ही सर्व समाज के विधायकों से अपील की थी कि ब्राह्मण उत्पीड़न का मामला प्रभावी ढंग से उठाएँ, ताकि उन पर अंकुश लगाया जा सके।

उन्होंने 9 सितंबर को ललितपुर में हुए ब्रह्म चेतना संवाद में हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्होंने ट्वीट किया था, “जब तक हमारे समाज का उत्पीड़न नहीं रुकेगा, तब तक हम अपनी आवाज़ बुलंद करते रहेंगे। हमारी एकता ही हमारे स्वाभिमान की रक्षा करती है।” अब जब उन्हें पश्चिम बंगाल में प्रभारी नियुक्त किया गया है तो वह वहाँ भी ब्राह्मणों को साथ लेकर चलने और उन्हें अपने वोट बैंक में शामिल करने के सारे प्रयास करेंगे।

इससे पूर्व, पश्चिम बंगाल के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के कुछ समय बाद ही अधीर रंजन चौधरी ने भी ब्राह्मण कार्ड खेलना शुरू कर दिया था। उन्होंने रिया चक्रवर्ती को बंगाली ब्राह्मण महिला के रूप में प्रदर्शित कर उनका समर्थन किया और ब्राह्मण समाज का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करनी शुरू कर दी।

हालाँकि, उन्होंने यह कदम उठाकर एक तीर से दो निशाने लगाने की योजना बनाई। पहली बिहार विधानसभा चुनाव में जिस तरह भाजपा दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को मुद्दा बना रही है, उसी तरह उन्होंने रिया चक्रवर्ती का बंगाल से नाता होने के नाते उनका समर्थन किया। साथ ही उन्होंने रिया पर ब्राह्मण कार्ड खेलकर समाज के इस बड़े वर्ग को भी लुभाने की पूरी कोशिश की।