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जदयू और लोजपा में जुबानी जंग शुरू, एक-दूसरे को दी अकेले चुनाव लड़ने की चुनौती

एनडीए के घटक दल जदयू और लोजपा के बीच बिहार विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई खटपट बढ़ती जा रही है। बुधवार (23 सितंबर) को दोनों दल के नेताओं ने एक-दूसरे की पार्टी को चुनाव में अकेले लड़ने की चुनौती दे डाली।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, लोजपा के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधानसभा चुनाव लड़ने की बात पर सीतामढ़ी से जदयू सांसद सुनील कुमार पिंटू ने कहा, “लोजपा मन में गलतफहमी न रखे। उसे लगता है तो वह अकेले चुनाव लड़के देख ले। नीतीश 1985 में विधानसभा चुनाव लड़कर जीत चुके हैं। उस वक्त चिराग बच्चे थे। कुछ कहने के पहले उन्हें हकीकत जाननी चाहिए।”

लोजपा के प्रवक्ता अशरफ अंसारी ने जवाब में कहा, “जदयू 2014 का लोकसभा चुनाव याद कर ले। अगर पार्टी में हिम्मत है तो वह अकेले चुनाव लड़कर देख ले। 2019 में प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से सुनील कुमार पिंटू सांसद बने थे। यह बात उन्हें हमेशा याद रखनी चाहिए।”

जदयू प्रदेश के मुख्य प्रवक्ता संयज सिंह ने कहा, “राजद में दम नहीं रहा तो तेजस्वी यादव अपने सहयोगी पार्टी के नेताओं को ही तोड़ने लगे हैं। उन्हें नेता मानने के लिए ना तो कांग्रेस तैयार है और ना ही रालोसपा। गठबंधन से सारी पार्टियाँ अलग होती जा रही हैं। यह भी नहीं पता कि दूल्हा कौन होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि इसमें तेजस्वी का दोष नहीं है। उन्होंने अपने पिता लालू प्रसाद से यह शिक्षा ली है, जो चाहते थे कि सभी उन्हीं को नेता मानें। यही वजह रही थी कि जनता दल बिखर गई। लोकतंत्र देखना है तो जदयू में देखिए। नीतीश कुमार लगातार लोगों से मिल रहे हैं, जो चुनाव लड़ने की चाहत रखते हैं, उनकी बातों को सुन रहे हैं।