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फारूक और उमर अब्दुल्ला ने रोशनी अधिनियम के सहारे कब्ज़ाई भूमि- प्रशासन

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला का नाम एक सूची में शामिल करके आरोप लगाया कि उन्होंने अपने रिहायशी आवास गैरकानूनी रूप से हासिल की गई भूमि पर बनाए हैं। यही नहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के जम्मू और श्रीनगर स्थित मुख्यालयों को भी रोशनी कानून के तहत वैध बनाया गया। हालाँकि, फारूक और उमर अब्दुल्ला ने आरोपों से इनकार किया है।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन ने विवादित रोशनी भूमि योजना के तहत गलत तरीके से भूमि हासिल करने वालों की सूची जारी की है। अपनी वेबसाइट पर सूचियों को प्रदर्शित कर जम्मू के संभागीय प्रशासन ने खुलासा किया कि सुजवाँ में करीब एक एकड़ क्षेत्र में फारूक और उमर का आवास अतिक्रमण वाली सरकारी भूमि पर बना है। राजस्व रिकॉर्ड में तो इसे नहीं दिखाया गया लेकिन इस पर अतिक्रमण किया गया।

अधिकारियों ने बताया, “फारूक अब्दुल्ला का मकान 1990 के दशक में बना था, जिसके लिए लकड़ियों का आवंटन सरकारी गोदाम से हुआ था। सभी राजस्व रिकॉर्ड में रिकॉर्ड मिलने के बाद ही यह जारी किया जाता है।”

उमर ने कहा, ”फारूक अब्दुल्ला ने श्रीनगर या जम्मू में अपने आवास के लिए रोशनी योजना का लाभ नहीं उठाया और जो भी ऐसा कह रहा है वह झूठ बोल रहा है। सूत्रों के हवाले से आई इस खबर में कोई तथ्य नहीं है।”

संभागीय प्रशासन ने उच्च न्यायालय के 9 अक्टूबर के आदेश के तहत सूची सार्वजनिक की। न्यायालय ने रोशनी कानून को ‘गैर कानूनी, असंवैधानिक बताया था और इसके तहत भूमि के आवंटन की सीबीआई जाँच का आदेश दिया था। कश्मीर के संभागीय प्रशासन ने 35 लाभार्थियों की सूची जारी करते हुए दिखाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्यालय, कई होटलों और दर्जनों वाणिज्यिक भवनों को कानून के तहत नियमित घोषित कर दिया गया।