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इसरो का भरोसेमंद पीएसएलवी 11 दिसंबर को अपना 50वाँ प्रक्षेपण करेगा, विनाशकारी था प्रारंभ

11 दिसंबर को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) अपने 50वें पेलोड का प्रक्षेपण कर इतिहास रचने वाला है।

द हिंदू बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार पीएसएलवी को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का सबसे अधिक परिश्रमी और भरोसेमंद यान माना जाता है और पिछले 26 वर्षों में इसने अपनी विश्वसनीयता साबित की है और इसकी वजह से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान मिली है।

जब अंतरिक्ष में उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की बात आती है तो सबसे पहले भारत का नाम आता है और भारत को इसका नेतृत्व करने वाला माना जाता है।

इसरो ने बीते वर्षों में कई देशों के उपग्रहों को प्रक्षेपित किया है और अब इसरो के कई अंतरराष्ट्रीय ग्राहक हैं जो चाहते हैं कि इसरो उनके छोटे उपग्रहों को पीएसएलवी के उपयोग से कक्षा में स्थापित करे।

पीएसएलवी अन्य देशों के प्रक्षेपण यान की तुलना में अत्यधिक सस्ता और भरोसेमंद है। इसकी यात्रा 1993 में पीएसएलवी-डी1 के साथ आईआरएस-1ई उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने में विफल रहने के कारण एक आपदा के साथ शुरू हुई थी। पर इस हादसे के बाद से प्रक्षेपण प्रणाली पूरी ताकत और शक्ति के साथ आगे बढ़ी है और जून 2017 तक एक के बाद एक 39 सफलतापूर्ण प्रक्षेपण किए गए।

पिछले 26 वर्षों में, पीएसएलवी ने 20 देशों के 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए 50 भारतीय उपग्रहों और 222 विदेशी उपग्रहों को प्रक्षेपित किया है।

पीएसएलवी का उपयोग 2008 में चंद्रयान-1 और 2013 में मंगल की परिक्रमा करने वाले उपग्रह को प्रक्षेपित करने के लिए भी किया गया था।