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इसरो ने निजी क्षेत्र द्वारा विकसित उपग्रहों के परीक्षण के लिए अपनी सुविधाओं को खोला

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने 50 साल के इतिहास में पहली बार दो उपग्रहों के साथ निजी क्षेत्र के लिए अपनी सुविधाओं को खोल दिया है। इसका बेंगलुरु स्थित देश के शीर्ष अंतरिक्ष अनुसंधान निकाय यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी) में परीक्षण किया जा रहा है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यूआरएससी पर जिन उपग्रहों का परीक्षण किया जा रहा है, उन्हें तमिलनाडु स्थित स्पेस किड्ज इंडिया और बेंगलुरु स्थित सियाजी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों द्वारा विकसित किया गया है। इसके अलावा, इसरो प्रमुख डॉक्टर के सिवन ने कहा, “इसरो यूनिटीसैट को भी सही करने में मदद कर रहा है, जिसे इसके पृथक्करण प्रणाली की समस्या थी।”

यूनिटीसैट तीन उपग्रहों का एक संयोजन है, जिसे श्रीपेरुमबुदूर स्थित जेप्पियार इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नागपुर के जीएच रायसोनी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और कोयंबटूर के श्री शक्ति इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के स्टूटेंड्स ने डिज़ाइन और निर्मित किया है।

आगामी कुछ महीनों में हैदराबाद स्थित स्काईरोट एयरोस्पेस और चेन्नई स्थित अग्निकुल कॉसमॉस भी क्रमशः श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट और तिरुवनंतपुरम स्थित रॉकेट केंद्रों पर अपने इंजनों का परीक्षण करेंगे।

इसरो जल्द ही मैपमाईइंडिया को अपनी उपग्रह छवियाँ देना शुरू करेगा, जो मानचित्रण सेवाएँ प्रदान करता है। इसरो को 26 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) आधारित अमेज़ॉन वेब सर्विसेज और वनवेब से लेकर सुनील मित्तल द्वारा समर्थित यूनाइटेड किंगडम (यूके) आधारित इकाई है, जो दूरसंचार प्रमुख भारती एयरटेल का नेतृत्व करती है।

प्रस्तावों की समीक्षा भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र द्वारा की जा रही है।