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संयुक्त चंद्र अभियान की तैयारी शुरू, इसरो और जापान की जाक्सा 2023 में करेंगे प्रक्षेपण

भारत और जापान रिश्तों को और मजबूत कर एक प्रमुख विकास में संयुक्त चंद्र अभियान शुरू करने के लिए तैयार हैं। इसे चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण कहा जा रहा है। इसके तहत दोनों देशों की शीर्ष अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसियाँ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) एकसाथ साझेदारी में काम करेंगी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इसरो और जाक्सा मिलकर पहली बार चंद्रमा की सतह पर लैंडर और रोवर को उतारने का प्रयास करेंगे। इस मिशन को 2023 के बाद प्रक्षेपित किया जाएगा। जाक्सा के डायग्राम्स के अनुसार, समग्र लैंडिंग मॉड्यूल और रोवर के निर्माण करने की उम्मीद है, जबकि इसरो लैंडर प्रणाली का निर्माण करेगा। यह मिशन जाक्सा के नामित एच3 रॉकेट पर जापान से लॉन्च किया जाएगा।

भारत और जापान के बीच इस तरह के संयुक्त चंद्र अभियान का विचार पहली बार 2017 में बेंगलुरु में एक बहु-अंतरिक्ष एजेंसियों की बैठक के दौरान सार्वजनिक किया गया था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में जब जापान का दौरा किया था तो यह विचार चर्चाओं में तब्दील हो गया था। इस साल की शुरुआत में ही मिशन के लिए एक व्यापक प्रबंधन योजना विकसित करने और अंतरिक्ष यान प्रणाली की ज़रूरतों और अन्य प्रासंगिक मामलों की जाँच के लिए एक पूर्व-परियोजना टीम की स्थापना की गई थी।

गौर करने वाली बात यह है कि अब तक इसरो देश के पहले मानव अंतरिक्ष यान कार्यक्रम गगनयान की तैयारी में लगा हुआ है। इसका लक्ष्य 2022 तक का है, जब भारत अपनी आजादी के 75 साल पूरे कर लेगा।