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इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने हिंदू लड़कियों को वापिस भेजा अपने पतियों के पास

पाकिस्तान सिंध के घोटकी इलाके से जिन दो नाबालिग हिंदू लड़कियों, रीना और रवीना को अगवाह कर जबरदस्ती इस्लाम क़ुबूल करवाया गया  उसकी शादी मुस्लिम लड़कों से करवाई गई थी। अब इस मामले में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने इन दोनों लड़कियों को उनके पति सफ़दर अली और बरकत अली के पास वापिस जाने का फैसला सुनाया है।

यह फैसला न्यायालय ने लड़कियों के उस कथित बयान के बाद सुनाया है जिसमें उन्होंने कहा है कि उन्होंने इस्लाम धर्म को अपनी मर्ज़ी ने अपनाया है क्योंकि उन्हें इस्लाम धर्म की शिक्षाएं अच्छी लगी थी।

इससे पहले इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने इस मामले की जांच के लिए एक पांच सदस्यीय आयोग का आयोजन किया था। जिसमें इस आयोग ने अनुमान लगाया था कि लड़कियों ने इस्लाम धर्म को अपने प्रेमियों से शादी करने के लिए अपनाया था। इस आयोग ने न्यायालय को यह भी बताया था कि एक चिकित्स्क रिपोर्ट के अनुसार यह दोनों लड़कियां 18 और 19 साल की हैं, और यह नाबालिग नहीं हैं।

इसी दौरान न्यायधीश मिनल्लाह ने आयोग के दूसरे सदस्य वकील आईए रहमान से भी मामले  के ऊपर अपने विचार मांगे थे और साथ ही उन केंद्रों की जांच के लिए कहा था जहाँ यह धर्मांतरण के कार्य किए जाते है, क्योंकि जबरदस्ती धर्मांतरण को रोकने के लिए कोई कानून नहीं हैं, द ट्रिब्यून  ने रिपोर्ट किया।