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आईएसआई एजेंट के सिम से पता चला कि पाकिस्तानी वॉट्सैप ग्रुप से जुड़े थे 56 भारतीय

उत्तर प्रदेश के चंदौली से सोमवार (20 जनवरी) को गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट के बारे में कई अहम खुलासे हुए हैं। जाँच में पता चला है कि वह एक एक वॉट्सैप ग्रुप चलाता था, जिससे 56 भारतीय जुड़े हुए थे।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस ग्रुप का नाम जिंदगी ना मिलेगी दोबारा था। इसको पाकिस्तान के आईएसआई हैंडलर्स चलाते थे।

काशी विश्वनाथ मंदिर, ज्ञानवापी मस्जिद, संकटमोचन मंदिर, कैंट रेलवे स्टेशन, दशाश्वमेध घाट, मालवीय पुल, कैंट और एयरफोर्स से जुड़े वीडियो और तस्वीरों को आईएसआई को भेजने के आरोप में मोहम्मद रशीद को गिरफ्तार किया गया था। उसको यूपी आतंकवादी निरोधक दस्ते ने सैन्य मिलेट्री इंटेलिजेंस के साथ एक संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया था।

एटीएस के एडीजी ध्रुवकांत ठाकुर ने बताया, “आईएसआई एजेंट के कब्जे से मिले एक सिम कार्ड की जाँच की गई है। उसमें पता चला कि उस नंबर का इस्तेमाल वह पाकिस्तान के आईएसआई हैंडलर्स के साथ बातचीत के लिए करता था।”

उन्होंने आगे बताया, “अभी तक किसी तरह का डाटा दोबारा नहीं निकाला जा सका है लेकिन एक वॉट्सैप ग्रुप के बारे में पता चला है, जिसमें 56 भारतीय जुड़े हुए थे। यूपी के अलावा, उसमें कुछ सदस्य दूसरे राज्यों के भी थे। हमने उनकी जानकारी पुलिस के साथ साझा कर दी है। ठाकुर ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था। शक जताया जा रहा है कि उसके कुछ रिश्तेदार भी उस वॉट्सैप ग्रुप के मेंबर थे, जिनसे पूछताछ की जा रही है।”