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वैटिकन का निशाना दूरस्थ क्षेत्रों पर, “स्थानीय दृष्टिकोण” से सोच रहे हैं पोप

दूरस्थ क्षेत्रों में अपनी पहुँच बनाने के लिए वैटिकन विवाहित आयु में बड़े पुरुषों को वहाँ जाने का निर्देश देने पर विचार कर रहा है। यह कदम अमेज़ॉन के दूरस्थ क्षेत्रों में ईसाई पादरियों की कमी को देखकर लिया जा सकता है।

साइनॉड ऑफ़ बिशप्स द्वारा जारी पत्र में कहा गया, “पादरियों की कमी के कारण वहाँ के समुदायों को युहरिस्ट मनाने में समस्या होती है।” चर्च इतिहास के प्राध्यापक रिवरेंड बफ़न का कहना है कि “स्थानीय लोगों और संस्कृतियों” को ध्यान में रखते हुए पोप “स्थानीय दृष्टिकोण” से सोच रहे हैं।

“समुदाय और प्रकृति के अनुसार कपड़े, स्थानीय भाषाओं के नृत्य और संगीत” को चर्च के क्रियाकलापों में समाहित करने का प्रस्ताव भी वैटिकन ने दिया है। ईसाई मिशनरियों को सालों से ऐसा करते हुए देखा जा सकता है।

भारत में हिंदू धर्म की आलोचना और हिंदुओं के विरुद्ध हिंसा तक का आह्वान करने के बावजूद ईसाई मिशनरियाँ हिंदू परंपराओं और संस्कारों को स्वयं में समाहित कर स्थानीय लोगों को रिझान ेका प्रयास करती आ रही हैं।

संस्कृत में जीसस मंत्र, जीसस गायत्री मंत्र, क्राइस्ट सहस्त्रनाम, जीसस नमस्कार आदि ऐसी परंपराओं की नकल मिशनरियों ने उतारी है। ईसाइयों के लिए वेद तक का प्रकाशन कर दिया है।