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आईसीएमआर- कोविड-19 टेस्ट की संख्या बढ़ाने के लिए एंटीजन जाँच किट की सिफारिश

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने भारत में कोविड-19 की जाँच के लिए स्वास्थ्य केंद्रों और निषिद्ध क्षेत्रों में आरटी-पीसीआर जाँच के साथ ही भारत में पहली एंटीजन जाँच किटों के उपयोग को भी मान्यता दी है।

भारत वर्तमान में प्रतिदिन 1.5 लाख आरटीपीसीआर परीक्षण कर रहा है। हालाँकि, इस नई सिफारिश की गई तकनीक का उपयोग करके परीक्षणों में काफी वृद्धि की जा सकती है।

स्वीकृत एंटीजन टेस्ट किट सार्स-सीओवी-2 के विशिष्ट एंटीजन की गुणात्मक पहचान का पता लगाने के लिये एक त्वरित क्रोमेटोग्राफिक इम्युनोएस्से है। इसे दक्षिण कोरिया स्थित कंपनी एसडी बायोसेंसर ने विकसित किया है।

प्रत्येक किट की कीमत 500 रुपये से कम है और इसे क्षेत्र की स्थितियों में उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी। यह आरटीपीसीआरसी परीक्षण के विपरीत 30 मिनट के भीतर परिणाम दिखा सकती है, जिसके लिए अमूमन प्रयोगशालाओं में 3 से 4 घंटे लगते हैं।

वहीं, आरटीपीसीआर अपेक्षाकृत महंगा होता है। इसमें प्रति परीक्षण किट की कीमत 2500 रुपये आती है। आरटीपीसीआर परीक्षणों के लिए नमूनों को प्रशिक्षित तकनीशियनों द्वारा सीमित संख्या में प्रयोगशालाओं में ले जाया जाना चाहिए।

दो स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर आईसीएमआर ने निर्धारित किया कि रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट की क्षमता (नकारात्मक परीक्षण जाँचने की क्षमता) 99.3 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक थी, जबकि संवेदनशीलता (सकारात्मकता का पता लगाने) की क्षमता 50.6 प्रतिशत से लेकर 84 प्रतिशत तक थी। एडवाइजरी में कहा गया, “अपेक्षाकृत कम संवेदनशीलता के कारण इसकी उच्च विशिष्टता को देखते हुए आईसीएमआर ने मानक क्यू कोविड-19एजी डिटेक्शन जाँच के उपयोग की सिफारिश की है।”