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भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने के बाद चार वैश्विक व 22 देशी कंपनियों ने भेजे प्रस्ताव

भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के नवनिर्मित अंतरिक्ष नियामक संस्था को अंतरिक्ष क्षेत्र को सरकार द्वारा खोलने के एक महीने के भीतर भारतीय और विदेशी फर्मों से कम से कम 26 प्रस्ताव मिले हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें ज़मीनी स्टेशनों के लिए अनुमोदन से लेकर उपग्रह नक्षत्रों को स्थापित करने, उपग्रहों व वाहनों को लॉन्च करने और एप्लिकेशन प्रदान करने तक शामिल है।

अमेरिका स्थित अमेज़ॉन वेब सर्विसेज़ (एडब्ल्यूएस) और भारतीय समूह समर्थित यूके-आधारित वनवेब उन विदेशी फर्मों में शामिल हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में रुचि दिखाई है। यूएई के आर्चरन ग्रुप और नॉर्वे के कोंग्सबर्ग सैटेलाइट सर्विस (केएसएटी) ने भी अपने प्रस्ताव इन-स्पेस को भेजे हैं।

एडब्ल्यूएस ने गेट-वे ग्राउंड स्टेशन को सेवा के रूप में उपलब्ध कराकर निजी अंतरिक्ष व्यवसाय को सक्षम बनाने के लिए अनुमति मांगी है। वनवेब ने एक छोटा उपग्रह तारामंडल स्थापित करने और सेवाएँ प्रदान करने का अनुरोध किया है। आर्चरन समूह छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए सहायता करना चाहता है और केएसएटी ग्राउंड स्टेशन स्थापित करना चाहता है।

24 भारतीय प्रस्तावों में टाटा के नेल्को ने लो-अर्थ ऑर्बिट नेटवर्क सेवाओं के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के लिए समर्थन मांगा है। एलएंडटी छोटे उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (एसएसएलवी) में एंड-टू-एंड रोल करना चाहता है।”

एस्ट्रोम टेक्नोलॉजीस, पिक्सल, बेंगलुरु से ध्रुव स्पेस, चेन्नई से एग्निकुल कॉस्मो और हैदराबाद के स्काईरूट एयरोस्पेस सहित कई स्टार्टअप्स ने सैटेलाइट उत्पादन, अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों के लॉन्च के लिए अनुमति मांगी है।

दिल्ली स्थित मापीइंडिया ने सेवाएँ प्रदान करने के लिए स्वीकृति का अनुरोध किया, जबकि बेंगलुरु के अल्फा डिजाइन ने छोटे उपग्रहों के लिए प्रौद्योगिकी की मांग की।

इनके अलावा, मंगलुरु के श्रीनिवास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यूनिटीसैट, आईआईटी-बी, आईआईटी-एम और स्पेसकिड्ज इंडिया सहित कई संस्थानों ने भी इन-स्पेस के सामने प्रस्ताव रखे हैं।