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डोकलाम पर 2017 में काम कर चुका प्रसिद्ध दल बढ़ते भारत-चीन गतिरोध से निपटेगा

लद्दाख में भारत और चीन के बीच वर्तमान में सीमा विवाद को लेकर बढ़े गतिरोध को लेकर 2017 में चीन के खिलाफ खड़ी रहने वाली प्रसिद्ध डोकलाम टीम फिर से कार्रवाई के लिए वापस आ गई है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रक्षा प्रमुख (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और विदेश मंत्री एस जयशंकर, जिन्होंने भारत की डोकलाम रणनीति में अहम भूमिका निभाई थी, ने मंगलवार (26 मई) को लद्दाख गतिरोध को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीति बैठक में हिस्सा लिया था।

डोकलाम संकट के दौरान जनरल रावत भारत के सेना प्रमुख थे और एस जयशंकर विदेश सचिव थे। वे अब लद्दाख में एलएसी पर चीनी आक्रामकता के लिए भारत की प्रतिक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं। हालाँकि, भारत बातचीत के माध्यम से एलएसी में तनाव को कम करने के प्रयास कर रहा है। साथ ही टीम को किसी भी घटना के लिए तैयार रहने के लिए भी कहा गया है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन के आक्रामक रवैये के बीच भारत ने अब पूर्वी लद्दाख के युद्ध क्षेत्र में ऊँचाई वाले स्थान पर सैनिकों और उनकी सहायता प्रणालियों को तैनात किया है। चीन लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) सेक्टर में भारत के बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर को रोकने के लिए उसका ध्यान भटकाना चाहता है।