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यूएनएचआरसी में मतदान से भारत का दूर रहने का निर्णय नई मुद्रा नहीं- विदेश मंत्रालय

भारत ने गुरुवार (3 जून) को इज़राइल के खिलाफ एक प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में मतदान से दूर रहने के अपने निर्णय का बचाव किया।

यूएनएचआरसी ने 27 मई को इस्लामिक देशों के संगठन (ओआईसी) की ओर से पाकिस्तान द्वारा तैयार किए गए एक प्रस्ताव को अपनाया था, जिसने फिलिस्तीन और इज़राइल में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के कथित उल्लंघन की जाँच के लिए एक अंतरराष्ट्रीय जाँच आयोग की स्थापना का मार्ग खोला था।

24 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि नौ ने विरोध किया था। इस बीच, भारत सहित 14 देशों ने प्रस्ताव पर मतदान से परहेज़ किया।

इस पर फिलिस्तीनी विदेश मंत्री रियाद मल्की ने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर को पत्र लिखा कि नई दिल्ली का इज़राइल विरोधी प्रस्ताव पर मतदान से दूर रहने का कदम सभी लोगों के मानवाधिकारों के खिलाफ था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने इस पर संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि फिलिस्तीन ने उन सभी देशों को समान पत्र लिखे थे, जिन्होंने यूएनएचआरसी के मतदान में भाग नहीं लिया था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हमने जो कदम उठाया है वह कोई नई मुद्रा नहीं है। हमने पहले भी कई अवसरों पर इससे परहेज़ किया है।”