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डीआरडीओ ने सैनिकों के लिए तैयार की ‘संजीवनी’- घायलों की बचाई जा सकेगी जान

सीमा पर शहीद होने वाली भारतीय सेना और अर्धसुरक्षा बालों के लिए वरदान के रूप में भारतीय वैज्ञानिकों ने डीआरडीओ की मेडिकल प्रयोगशाला में ऐसी दवाएँ बनाई हैं जिनकी मदद से गंभीर रूप से घायल सैनिकों के जीवन को गोल्डन पीरियड (नाज़ुक समय) की अवधि बढ़ाकर बचाया जा सकता है। दवाओं में खून के बहाव को रोकने की दवा, अवशोषक ड्रेसिंग और ग्लिसरेटेड सैलाइन शामिल हैं।

भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लेकर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के जंगलों में बसे आतंकवादियों और नक्सलियों से मुठभेड़ में कई सैनिक गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं जिसके बाद तत्कालीन इलाज न मिलने पर 90 प्रतिशत जवानों की जान चली जाती है और इस तरह से हम भारत के वीर सैनिकों को खो देते हैं। इस समस्या से लड़ने के लिए वैज्ञानिकों ने ऐसी औषिधि बनाई है जिसके तत्कालीन इस्तेमाल से जवानों के खून के बहाव को रोका जा सकेगा और इलाज के लिए अस्पताल ले जाने तक के समय में यह दवाएँ उनके लिए जीवन वरदान का काम करेंगी।

डीआरडीओ में जीव विज्ञान के महानिदेशक एके सिंह ने पुलवामा आतंकी हमले का ज़िक्र करते हुए बताय कि ये औषिधियाँ स्वदेश निर्मित हैं और इन्हें भारत के सैनिकों की जान बचाने के लिए बनाया गया है।