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रेलवे स्टेशन- सुरक्षा बढ़ाने के लिए होगा चेहरा पहचानने वाली तकनीक का उपयोग

रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा बढ़ाने और अपराधियों की पहचान करने के लिए भारतीय रेलवे आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस की सहायता से चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक का उपयोग करने के बारे में विचार कर रही है। दूसरी ओर इंटरनेट स्वतंत्रता कार्यकर्ता ने चेतावनी दी है कि यह व्यक्तिगत गोपनीयता का उल्लंघन हो सकता है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की योजना चेहरे की पहचान प्रणाली (एफआरएस) को मौजूदा डेटाबेस जैसे अपराध व आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस) से जोड़ने की है।

इससे रेलवे स्टेशन पर अपराधियों और संदिग्धों की पहचान करने में मदद मिलेगी। हमेशा स्टेशन पर यात्री चोरी की घटनाओं को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं। साथ ही इससे मानव तस्करी और आतंकवाद जैसे गंभीर अपराधों की भी देखरेख की जा सकेगी।

मुंबई में 26/11 हमले के बाद आरपीएफ ने एक व्यापक, एकीकृत सुरक्षा योजना का मसौदा तैयार किया है। आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार ने कहा, “हमने इस सुरक्षा की जाँच के लिए 200 रेलवे स्टेशनों की पहचान की है”।

कुमार ने कहा, “हम अवधारणा के सबूत के तौर पर बेंगलुरु स्टेशन पर चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक से काम करना शुरू कर रहे हैं और इसे धीरे-धीरे लागू करने की योजना बना रहे हैं।”

जुलाई में बेंगलुरु हवाई अड्डे पर चेहरे की पहचान की तकनीक शुरू की गई थी। हैदराबाद हवाई अड्डे में भी इसका परीक्षण किया गया था। हालाँकि, मानवाधिकार समूह इसे संभावित गोपनीयता उल्लंघन और निगरानी बढ़ाना कह रहा है।