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भारतीय नौसेना को पहला स्वदेशी निर्मित पनडुब्बी टॉरपीडो वरुणास्त्र जल्द मिलेगा

भारत की नौसेना की मारक क्षमता को बढ़ावा देने के लिए, भारतीय नौसेना को स्वदेशी निर्मित भारी एंटी-सबमरीन टॉरपीडो, ‘वरुणास्त्र’, का पहला जत्था प्राप्त करने के लिए तैयार है।

डीएनए इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार भारी वजन वाले टॉरपीडो का पहला जत्था जल्द ही भारतीय नौसेना को दिया जाएगा और इसे सिंधु श्रेणी की पनडुब्बियों और अन्य नौसैनिक जहाजों पर लगाया जाएगा।

जिसकी मदद से भारत उन आठ देशों में से एक बन जाएगा जिनके पास इस तरह की स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रणाली है।

लगभग 1.5 टन वजनी, वरुणास्त्र जल में 40 किलोमीटर की सीमा तक में जहाजों और पनडुब्बियों सहित, लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम है। यह लगभग 250 किलोग्राम के उच्च विस्फोटक को 40 नॉटिकल मील प्रति घंटे (74 किलोमीटर प्रति घंटे) की रफ्तार से ले जा सकता है।

भारतीय नौसेना ने जुलाई 2018 में रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) एवं नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल) द्वारा डिजाइन किए गए टारपीडो को शामिल किया था, जिसके बाद नौसेना ने 1,188 करोड़ रुपये में 63 ऐसी प्रणालियों का आदेश दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, वरुणास्त्र को कोलकाता वर्ग, राजपूत वर्ग और दिल्ली श्रेणी के विध्वंसक द्वारा चलाया जाएगा। इसे कामोर्ट वर्ग वाहक और तलवार वर्ग युद्ध-पोत पर भी लगाया जाएगा। भारतीय नौसेना की सिंधुघोष वर्ग की पनडुब्बियों का सबसे बड़ा बेड़ा भी वरुणास्त्र लेकर। चलेगा।