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भारत-विरोधी टिप्पणी के बाद मलेशिया से ताड़ का तेल नहीं खरीद रहे हैं व्यापारी

मलेशिया के साथ भारत के तल्ख होते संबंधों के बाद नई दिल्ली आयात शुल्क बढ़ाने या ताड़ के तेल के आयात को रोकने जैसे अन्य उपायों को लागू कर सकता है। फिलहाल, भारतीय रिफाइनरियों ने मलेशिया से तेल खरीदना बंद कर दिया है, जो इसका सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।

टीओआई ने यह रिपोर्ट रायटर्स से पाँच व्यापारियों की बातचीत के बाद पेश की है। भारतीय रिफाइनरों ने नवंबर और दिसंबर के लिए मलेशियाई ताड़ के तेल के आयात को बंद कर दिया है। भारत 2019 में अब तक मलेशियाई पाम तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। अगर सरकार आयात पर अंकुश लगाती है तो नई परिस्थितियाँ बनेंगी और इसकी कीमतों पर दबाव डाल सकता है।

यह कदम मलेशिया के प्रतिद्वंद्वी इंडोनेशिया को भारत में आयात बढ़ाने में मदद कर सकता है। सरकार कुआलालंपुर के बाद मलेशियाई आयातों पर कुछ प्रतिबंधों पर विचार कर सकती है। दरअसल, हाल ही में हुई संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में मलेशिया ने कश्मीर मुद्दे पर भारत की आलोचना की थी।

हालाँकि, मलेशियाई पाम तेल के संबंध में सरकार का कोई आधिकारिक निर्देश नहीं आया है। मुंबई के एक व्यापारी ने बताया, “हमें मलेशिया के साथ व्यापार करने से पहले स्पष्टता की ज़रूरत है। यही वजह है कि नवंबर में उनकी कंपनी द्वारा खरीदा जाने वाला 5000 टन ताड़ का तेल अब अगली सूचना तक रोक दिया गया है।

व्यापारी ने कहा, “यदि सरकार ने आने वाले दिनों में इस मामले में स्पष्टता नहीं दिखाती है तो वह इंडोनेशिया से इसका आयात करेंगे। मुंबई के वनस्पति तेल आयातक सनविन ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप बाजोरिया ने कहा, “दोनों तरफ से व्यापारी भ्रमित हैं। वे नहीं जानते हैं कि कैसे शिपमेंट की योजना बनाएँ। अब सतर्कता बरतते और देश को प्राथमिकता देते हुए व्यापारी इंडोनेशिया से तेल का आयात करना पसंद कर रहे हैं।”