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भारतीय सेना का पहला एकीकृत युद्ध समूह भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनात होगा

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा, “भारतीय सेना इस साल के अंत तक भारत-पाकिस्तान सीमा पर अपने पहले एकीकृत युद्ध समूह (आईबीजी) को तैनात करने की तैयारी में है।”

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने हिमाचल प्रदेश के योल स्थित 11वीं वाहिनी समूह के पुनर्गठन को मंजूरी दी है, ताकि देश की पश्चिमी सीमा पर तैनात किए जाने वाले आईबीजी को तैयार किया जा सके।

2009 में बनाए गए 11वीं वाहिनी समूह सेना के सबसे युवा वाहिनी में से एक है। यह हरियाणा स्थित चंडीमंदिर पश्चिमी सेना कमान का हिस्सा है। जनरल रावत ने कहा, “सेना की युद्ध क्षमता का पुनर्गठन सेक्टर से सेक्टर तक चुनिंदा होगा, जो सेना के सबसे बड़े पुनर्गठन में से एक है।”

जनरल रावत ने अभ्यास के तर्क को स्पष्ट करते हुए कहा, “जम्मू-कश्मीर की अंतर-राष्ट्रीय सीमा के हिस्से में दूसरों को देखने के बाद पुनर्गठन होगा। इसके बाद भारतीय सेना को लड़ाई इकाई बना देंगे।” कम से कम तीन ब्रिगेड वाली प्रत्येक सेना कोर की पारंपरिक लड़ाई इकाइयों के विपरीत आईबीजी छोटी, मध्यम, स्व-निहित लड़ाई इकाइयाँ होंगी, जिसमें तोपखाने, वायु शक्ति और अन्य सामान शामिल होंगे।

मेजर जनरल रैंक के एक अधिकारी की कमान वाले आईबीजी के पास उस इलाके के आधार पर 6-8 बटालियन होंगी, जहाँ उसे तैनात किया जाएगा। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, “आईबीजी की संरचना कार्य और लड़ाई के आदेश के आधार पर अलग-अलग होगी। रिपोर्ट में अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि आईबीजी औसतन 20,000- 25,000 पुरुषों को शामिल करेगा।

प्रत्येक आईबीजी एक स्व-निहित लड़ाई इकाई होगी। हालांकि, यह अन्य यूनिट से समर्थन ले सकती है। भारतीय सेना ने देश की पश्चिमी और पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा के लिए 11-13 आईबीजी बनाने और तैनात करने की योजना बनाई है।