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भारतीय सेना में जल्द शामिल होगी सबसे लंबी मारक क्षमता वाली स्वदेशी एटीएजीएस

भारतीय सेना जल्द ही स्वदेशी रूप से विकसित उन्नत टॉ आर्टिलरी गन (एटीएजीएस) को स्वचालित गोला बारूद हैंडलिंग सुविधा के साथ शामिल करेगी।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव जी सतेश रेड्डी ने बताया, “155 मिमी और 52 कैलिबर की हॉवित्जर अपनी कक्षा में दुनिया की सबसे लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली बंदूक प्रणाली है। इसने सभी परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। अब बस इसे कुछ परीक्षणों के बाद भारतीय सेना में शामिल कर लिया जाएगा।”

डीआरडीओ के आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान द्वारा विकसित एटीएजीएस छह दौर की स्वचालित मैग्जीन के साथ आती है, जो मौजूदा 155 मिमी और 52-कैलिबर बंदूकों की तुलना में 30 सेकंड में फायरिंग करने में सक्षम है। वर्तमान में, मैग्जीन्स को मैन्युअल रूप से लोड करने की आवश्यकता है, जो एक अभ्यास के दौरान हताहतों की संख्या की संभावना को बढ़ाती है।

एटीएजीएस की अधिकतम फायरिंग रेंज 48 किलोमीटर है। इसे तीन मिनट से भी कम समय में तैनात किया जा सकता है। इस नई बंदूक प्रणाली का वजन करीब 18 टन है। इसका पोखरण में ग्रीष्मकालीन परीक्षण किया गया और सिक्किम में शीतकालीन परीक्षण किया गया।