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भारतीय सेना का फैसला- भविष्य में तीनों सेना बल साथ मिलकर करेंगे संकट का सामना

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को ध्यान में रखते हुए भारत की तीनों सेनाओं (जल सेना, थल सेना और वायु सेना) ने आने वाले समय में सभी मुसीबतों का एक साथ सामना करने का फैसला लिया है।

यह फैसला 8 अप्रैल से शुरू हुई भारतीय सेना कमांडर कांफ्रेंस में लिया गया जहाँ सेना के प्रमुख बीएस धनोआ और जल सेना के प्रमुख सुनील लांबा भी उपस्थित थे। सेनाओं के बीच अच्छी समझ और आने वाले समय में साथ काम करने के लिए वायु सेना के प्रमुख बीएस धनोआ ने थल सेना कमांडर और बाकी कर्मचारियों को वायु सेना की काबिलियत और उनकी रणनीतियों के बारे में बताया।

सम्मेलन में तीनों सेनाओं के कमांडरों ने देश की वर्तमान सुरक्षा और आने वाले समय में सुरक्षा को लेकर उठाने वाले कदम के बारे में भी चर्चा की है। कांफ्रेंस में इस बात पर ज़ोर दिया है कि भारतीय सेना शांति सुरक्षा के हित में है और आने वाले समय में देश के लिए होने वाले खतरों से भी पूरी तरह लड़ने के लिए तैयार है। सेना ने आश्वासन दिया है कि आतंकवाद के लिए कोई भी मौका नहीं छोड़ेगी।

तीनो सेनाओं के साथ मिलकर काम करना खतरों से लड़ने के लिए रणनीतियां बनाने में मदद करेगा और उन्हें बेहतर बनाएगा। कांफ्रेंस में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए सेना के भविष्य में रक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले नए उपकरणों का प्रदर्शन भी किया गया था।

तीनों सेनाओं का सुरक्षा के लिए ख़ास ध्यान उत्तरी सीमा पर है। वहीं भारतीय सेना के प्रमुख बिपिन रावत ने नई तकनीकियों के इस्तेमाल की ज़रूरतों पर ज़्यादा ज़ोर डाला।