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बातचीत की नीति अपनाते हुए अफगानिस्तान के तालिबान की भारत से वार्ता में रुचि

पिछले दो दशक से भारत की तालिबान से कोई औपचारिक वार्ता नहीं हुई है। अब अफगानिस्तान में तालिबान भारत से बातचीत की दिशा में कदम बढ़ाने पर विचार कर रहा है।

द हिंदू  की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले आतंकियों द्वारा 1999 में आईसी814 भारतीय विमान हाइजैक करने के बाद भारत की अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के साथ बात हुई थी और उन्होंने इस्लामिक ग्रुप हरकत-उल-मुजाहिदीन और अटल बिहारी बाजपेयी सरकार के बीच मध्यस्थता की थी।

एक रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के एक अधिकारी का कहना है, “विमान लेना हमारी घोषित नीति के विरुद्ध है। हमें इस घटना के बीच में डाला गया और हमने शांति से स्थिति को हल करने की कोशिश की थी। इसके बाद भारत सरकार ने विमान और बंधकों की रिहाई पर तालिबान के लिए अपनी प्रशंसा व्यक्त की थी।”

सूत्रों के अनुसार, तालिबान ने भविष्य के लिए बातचीत की नीति अपनाई थी और भारत उस बाचचीत का अब हिस्सा बन सकता है। 2019 से पहले यूएन ने समूह के सदस्यों पर प्रतिबंधों को हटा दिया था, जिसके बाद कुछ देशों जैसे चीन, रूस और इरान ने समूह से बात की थी।

तालिबान वर्तमान में अमेरिका के साथ सेना की वापसी और शत्रुता को रोकने के लिए वार्ता में लगा हुआ है। ट्रंप सरकार ने वार्ता के लिए 1 सितंबर की समय सीमा निर्धारित की है। हालाँकि, तालिबान अशरफ गनी के नेतृत्व वाली अफगान राष्ट्रीय सरकार के साथ एक क्षेत्रीय संघर्ष में लगा हुआ है और देश के कई जिलों को नियंत्रित करता है।