समाचार
यूरोपीय संघ की संसद में सीएए-विरोधी प्रस्ताव पर विचार, भारत ने लगाई फटकार

रविवार (26 जनवरी) को भारत ने यूरोपीय संघ की संसद को फटकार लगाई है। लाइवमिंट की रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय संघ की संसद नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (सीएए) के खिलाफ एक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है जिस पर भारत ने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है।

भारत ने इस बात पर भी ज़ोर दिया है कि राष्ट्र के नागरिकता कानूनों में संशोधन को प्रत्येक संसद के दोनों  सदनों द्वारा विस्तृत बहस के बाद उचित प्रक्रिया और लोकतांत्रिक साधनों के तहत लागू किया गया है।

रिपोर्ट में इस घटनाक्रम से जुड़े एक व्यक्ति को यह कहते हुए सुना गया है, “प्रत्येक समाज जो नैसर्गिककरण के लिए मार्ग प्रशस्त करता है, एक संदर्भ और मापदंड दोनों पर विचार करता है। यह भेदभाव नहीं है। वास्तव में, यूरोपीय समाजों ने भी समान दृष्टिकोण का पालन किया है।”

भारत ने उम्मीद जताई है कि उक्त प्रस्ताव के समर्थक और प्रायोजक इसके साथ जुड़ेंगे ताकि तथ्यों का सही आकलन हो सके। भारत ने यह भी दावा किया है कि लोकतंत्र के रूप में, यूरोपीय संघ की संसद को दुनिया में कहीं और लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रतिनिधियों के अधिकारों और प्राधिकरणों के लिए आवाज़ नहीं उठानी चाहिए।

सीएए को 11 दिसंबर को अनिवार्य संसदीय मान्यता प्राप्त हुई थी। इसके एक दिन बाद अधिनियम को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की स्वीकृति प्राप्त हुई। आखिरकार, इस साल 10 जनवरी को अधिनियम को अधिसूचित किया गया और इसे लागू किया गया।