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‘विभाजन के समय ही भारत को हिंदू राष्ट्र बन जाना चाहिए था’- मेघालय उच्च न्यायालय

मेघालय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एसआर सेन ने सेना में नियुक्त एक व्यक्ति के मूल निवासी प्रमाण पत्र के खारिज़ होने के मामले में निर्णय लेते हुए कहा कि जब लाखों हिंदू तथा सिखों को प्रताड़ित किया जा रहा था व उनकी हत्याएँ की गईं थी, तब ही भारत को विभाजन के बाद ही हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था, लाइव लॉ  की रिपोर्ट में बताया गया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को कभी भी मुस्लिम राष्ट्र नहीं बनने दिया जाएगा।

अपने निर्णय में न्यायाधीश सेन ने कहा, “भारत का बहुत खून बहने के बाद उसे आज़ादी मिली है और इसमें सर्वाधिक पीड़ा हिंदू तथा सिखों को हुई है जिन्हें अपनी विरासतें तथा जन्मभूमि, आँसू तथा भय से त्यागनी पड़ी थी, यह हम कभी नहीं भूलेंगे। मैं यह कहते हुए गलत नहीं हूँ कि जब सिख आए थे तो उन्हें सरकार द्वारा पुनर्वास की सुविधा मिली थी किंतु हिंदुओं को नहीं।”

उन्होंने यह भी कहा कि किस तरह हिंदू, सिख, पारसी, खासी तथा अन्य समुदायों को पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान तथा बांग्लादेश में उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि विभाजन के वक़्त आए हिंदू शरणार्थियों को अभी तक ठीक तरह से पुनर्वास नहीं मिल पाया है।

उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान ने खुद को मुस्लिम राष्ट्र घोषित कर दिया तो भारत को भी विभाजन के बाद हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना था लेकिन भारत धर्म निरपेक्ष राष्ट्र बना हुआ है।

न्यायाधीश सेन ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक मोदी सरकार सत्ता में है तब तक भारत को कोई भी मुस्लिम राष्ट्र नहीं बना सकता। उन्होंने आगे प्रधानमंत्री, गृहमंत्री तथा अन्य से विनती की, कि अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान तथा बांग्लादेश के गैर-मुस्लिम समुदायों को बिना किसी दस्तावेज़ या प्रमाण के भारत की नागरिकता देने पर एक कानून बनाना चाहिए।