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ब्रिटिश संसद में किसान आंदोलन का मामला उठाए जाने पर भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

भारत में चल रहे किसान आंदोलन का मुद्दा एक याचिका पर लाखों लोगों के हस्ताक्षर के बाद ब्रिटिश संसद में सोमवार (8 मार्च) को उठाया गया, जिस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए फटाकार लगाई है। लंदन में स्थित भारतीय उच्चायुक्त ने कहा, “यह सिर्फ गलत तथ्यों पर आधारित एकतरफा बहस थी।”

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय उच्चायोग ने एक बयान में कहा, “ब्रिटिश मीडिया समेत विदेशी मीडिया भारत में मौजूद है। वे उन सभी घटनाओं को देख चुके हैं, जिसकी चर्चा हुई है। भारत में मीडिया की स्वतंत्रता का सवाल कभी उठा ही नहीं है।”

आगे कहा गया, “बेहद दुखद है कि एक संतुलित बहस की बजाय बिना किसी ठोस आधार के झूठे दावे किए गए। इसने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में से एक और उसके संस्थानों पर प्रश्न खड़े किए हैं। जिन सभी मुद्दों को उठाया गया, वे भारत में स्थापित स्वतंत्र लोकतांत्रिक संस्थाओं पर चोट है।”

ब्रिटिश संसद की वेबसाइट पर किसान आंदोलन पर चर्चा को लेकर एक याचिका डाली गई थी। इस पर एक लाख से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए थे। इस वजह से इस मामले पर बहस की गई थी। ब्रिटेन की सरकार पूर्व में ही नए कृषि कानूनों के मुद्दे को भारत का घरेलू मामला बता चुकी है।

भारतीय उच्चायोग ने कहा, “ब्रिटिश समेत दुनिया की मीडिया भारत में किसान आंदोलन को फॉलो कर रही है, जो दर्शाता है कि किसानों पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जा रहा है।”