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डब्ल्यूएचओ संग कोविड-19 के उपचार में इबोला दवा के उपयोग का परीक्षण भारत में भी

भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की दवा रेमेडिसविर के परीक्षण के लिए उसके साथ एकजुटता से लग गया है। कोविड-19 से संक्रमित मरीज, जिन्हें ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की ज़रूरत थी, उनके उपचार में यह दवा कारगर नजर आ रही थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, डब्ल्यूएचओ के परीक्षणों का सदस्य होने के नाते भारत को इससे होने वाले लाभों का उपयोग करने में मदद मिलेगी। अगर कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के उपचार में दवा का इस्तेमाल किया जाता है तो। हालाँकि, दवा के क्लीनिकल परीक्षण होने अभी बाकी हैं।

रेमेडिसविर दवा को इबोला के खिलाफ लड़ाई में कारगर होने के लिए विकसित किया गया था। अमेरिका, कनाडा, यूरोप और जापान में गंभीर लक्षणों वाले दो-तिहाई मरीजों में इसका फायदा दिखा था, जिन्हें पहले ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की ज़रूरत थी।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) ने सोमवार को दैनिक प्रेसवार्ता में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के डॉक्टर रमन गंगाखेडकर द्वारा जारी इस विकास के बारे में जानकारी दी थी। यह भी गौर किया जाना चाहिए डब्ल्यूएचओ का एकजुटता परीक्षण कोविड-19 के खिलाफ अन्य दवाओं की उपयोगिता के विश्लेषण पर भी काम कर रहे हैं।

उधर, डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी कि कोविड-19 स्वाइन फ्लू से 10 गुना ज्यादा घातक है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेसियस ने कहा, “कई देशों के साक्ष्य हमें इस वायरस के बारे में स्पष्ट जानकारी दे रहे हैं कि कैसे यह व्यवहार करता है, इसे कैसे रोका जा सकता है और कैसे इसका इलाज हो सकता है।”