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भ्रष्टाचार में चीन से बेहतर स्थिति में भारत, जिनपिंग का एंटी-ग्राफ्ट अभियान विफल

चीन को एक बड़ा झटका लगा जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सुर्खियाँ बटोरने वाला एंटीग्राफ्ट अभियान भ्रष्टाचार को कम करने में असफल हो गया। चीन का पायदान 87वें स्थान पर पहुँच गया जबकि 2017 में चीन 77वें स्थान पर था। न्यू इंडियन एक्सप्रेस  की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अपनी स्थिति में सुधार किया है और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा एक वार्षिक सूचकांक में 78वें स्थान पर पहुँच गया है जबकि 2017 में भारत 81वें स्थान पर था।

2012 में दूसरी बार सत्ता में आने वाले चीन के राष्ट्रपति ने चीन कम्युनिस्ट पार्टी  में हो रहे भ्रष्टाचार को कम करने हेतु और सैन्य शक्ति बढ़ाने को अपना उद्देश्य मानकर पद संभाला था अभी तक 1.3 करोड़ अफसरों को पकड़कर उनके खिलाफ एंटीग्राफ्ट अभियान के तहत कार्यवाही की जा चुकी है। हालाँकि यह दावा भी किया जाता है कि जिनपिंग ने एंटीग्राफ्ट अभियान का इस्तेमाल अपने पार्टी में और सेना में अपने शक्तियों को समेकित करने हेतु किया है।

एशियाप्रशांत के क्षेत्र के अन्य देशों में, डेनमार्क पहले स्थान पर, न्यूज़ीलैण्ड दूसरे स्थान पर और सिंगापुर तीसरे स्थान पर हैं। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट  में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल रिपोर्ट का हवाला देकर कहा गया था– “एशियाप्रशांत क्षेत्र कमज़ोर लोकतांत्रिक संस्थानों की व्यापकता और कानूनों और प्रवर्तन तंत्रों की कमी की वजह से निष्क्रिय है।“ वियतनाम 117वें स्थान पर है।

पहली बार अमेरिका शीर्ष 20 के सूची से बाहर हो गया। पिछले स्थान से छः रैंक पीछे होकर इसने 22वाँ स्थान प्राप्त किया है।