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जयशंकर ने चीनी मंत्री को कहा, “यथास्थिति बदलने का एकतरफा प्रयास स्वीकार नहीं”

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच बढ़े सीमा विवाद को लेकर मॉस्को में चल रही शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्सा लेने गए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच गुरुवार (10 सितंबर) रात को करीब ढाई घंटे तक द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस दौरान तनाव खत्म करने को लेकर पाँच बिंदुओं पर सहमति बनी।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में दोनों देशों के बीच सहमति बनी कि सीमा विवाद का हल वे वार्ता के माध्यम से निकालेंगे। इसके लिए विभिन्न स्तरों (कूटनीतिक, सैन्य) पर वार्ता जारी रहेगी।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, “बैठक में दोनों ओर से सहमति जताई गई कि भारत-चीन संबंधों को विकसित करने के लिए दोनों पक्षों को नेताओं की आम सहमति की शृंखला से मार्गदर्शन लेना चाहिए। साथ ही मतभेदों को खत्म करना चाहिए।”

वांग यी के हवाले से चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, “चीन और भारत के संबंध एक बार फिर दोराहे पर खड़े हैं। हालाँकि, जब तक दोनों पक्ष अपने संबंधों को सही दिशा में बढ़ाते रहेंगे, तब तक कोई परेशानी नहीं होगी। ऐसी कोई भी चुनौती नहीं होगी, जिसको हल न किया जा सके।”

विदेश मंत्री ने बैठक में यह भी साफ कर दिया कि भारत एलएसी पर जारी तनाव को नहीं बढ़ाना चाहता है। चीन के प्रति उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सरकार के सूत्रों की मानें तो विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ तौर पर कहा था कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रबंधन पर सभी समझौतों का पूर्ण पालन होने की उम्मीद है और एकतरफा रूप से यथास्थिति को बदलने के किसी भी प्रयास को नहीं माना जाएगा।