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“वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में 2015 के बाद से आई 47 प्रतिशत गिरावट”- किशन रेड्डी

वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से संबंधित घटनाओं को लेकर 2009 से 2014 तक की तुलना 2015 से 2020 तक करने पर पता चलेगा कि इनमें छह वर्षों में 47 प्रतिशत कमी आई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने बुधवार (10 फरवरी) को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में जानकारी दी कि नक्सली हिंसा के भौगोलिक प्रसार को देखें तो 2013 में 10 राज्यों के 76 जिले इसमें शामिल थे। 2020 में देखें तो इनका प्रसार नौ राज्यों के 53 जिलों तक ही रह गया था।

मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा, “वामपंथी उग्रवाद का सामना करने के लिए बहु-आयामी रणनीति के लगातार कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप हिंसा और इनके भौगोलिक प्रसार में लगातार गिरावट आई है।”

उन्होंने कहा, “वामपंथी उग्रवादियों की हिंसा की घटनाएँ 2009 में 2258 हुई थीं, जो सबसे अधिक थीं। ऐसी घटनाएँ 70 प्रतिशत घटकर 2020 में 665 रह गई थीं। इसी तरह मौतों (नागरिकों और सुरक्षाबलों) के मामले में 2010 में 1005 के उच्चतम स्तर को छुआ था, जो 2020 में 183 के साथ 80 प्रतिशत कम हो गई थीं। 2013 में 10 राज्यों की तुलना में इनके प्रसार को सीमित कर दिया गया। 2020 में नौ राज्यों में ही एलडब्ल्यूई से संबंधित हिंसा की सूचना मिली थीं।”