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बंगाल राजनीतिक हिंसा- तीन दुष्कर्म उत्तरजीविकाओं ने सर्वोच्च न्यायालय में लगाई गुहार

बंगाल में चुनाव परिणाम आने के बाद कथित रूप से टीएमसी द्वारा की गई हिंसा का संज्ञान लेने के बाद सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुईं कई और उत्तरजीविकाओं ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। उन्होंने 15 दिनों तक हिंसा की घटनाओं, सामूहिक दुष्कर्म और पुलिस की कथित निष्क्रियता के बारे में बताया। साथ ही मामले की एसआईटी जाँच की मांग की।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, 60 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया कि 3 मई को टीएमसी कार्यकर्ताओं की भीड़ ने पूरबा मेदिनीपुर के एक गाँव में उसके घर को बम से उड़ाने की धमकी दी। अगले दिन बहू घर से निकल गई। 4 व 5 मई की रात को घर में पाँच टीएमसी कार्यकर्ता घुस गए। आरोपियों ने छह वर्षीय पोते के सामने मुझसे सामूहिक दुष्कर्म किया। मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। पुलिस ने पाँच नामजद में से एक को ही आरोपी बनाया।

एक 17 वर्षीय नाबालिग ने बताया, “9 मई को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने सामूहिक दुष्कर्म के बाद मुझे जंगल में मरने के लिए छोड़ दिया था। अगले दिन टीएमसी का स्थानीय नेता बहादुर एसके घर आया और शिकायत पर मारने की धमकी दी। मुझे बाल कल्याण गृह में रखा जा रहा और घरवालों से मिलने नहीं दिया जा रहा। पुलिस दबाव बना रही कि दूसरी बेटी के साथ भी ऐसा ही हो सकता है।”

पीड़िता पूर्णिमा मंडल ने बताया, “14 मई को दिनदहाड़े पति पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया। मुझे पति और साले पर किए जा रहे हमले को देखने के लिए बंधक बनाया गया। भीड़ से दो टीएमसी कार्यकर्ताओं ने मुझे निर्वस्त्र किया, दुष्कर्म की कोशिश की। मैं बचने के लिए संघर्ष करती रही। हमले का नेतृत्व स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधि कालू शेख कर रहा था। 16 मई को पति का निधन हो गया। पुलिस ने शिकायत करने पर मुझे थाने से भगा दिया।”